न्यूज़समारोह

सूरजकुण्ड मेला में हुआ फैषन शो का आयोजन

-माॅडलों ने रैंप पर बिखेरा जलवा
-उत्तर प्रदेष के कपडा मंत्री श्री सत्यदेव पचैरी ने किया फैषन शो की शुरूआत
-सूरजकुण्ड मेला प्राधिकरण के प्रषासक श्री संुधाषु गौतम भी थे मौजूद
सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 11 फरवरी – हरियाणा के जिला फरीदाबाद के सूरजकुण्ड में चल रहे 32वें सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय षिल्प मेला के दौरान फैषन षो का आयेाजन किया गया जिसका षुभारंभ उत्तर प्रदेष के कपडा मंत्री श्री सत्यदेव पचैरी ने किया। इस मौके पर हरियाणा पर्यटन विभाग के अतिरिक्त प्रबंध निदेषक व सूरजकुण्ड मेला प्राधिकरण के प्रषासक श्री संुधाषु गौतम भी उपस्थित थे।
फैषन शो के दौरान विभिन्न महिला व पुरूष माॅडलों ने उत्तर प्रदेष के विभिन्न क्षेत्रों में पहने जाने वाले परिधानों को रैम्प पर प्रदर्षित किया। इस फैषन षो में उत्तर प्रदेष के परिधानों को दर्षाया गया और यूपी नए अंदाज में थीम दी गई।  फैषन षो में उत्तर प्रदेष के यूपी नए अंदाज की थीम पर फैषन डिजाइनर वैरिजा बजाज ने परिधानों को तै​यार किया था और रैम्प पर बेहतरीन तरीके से उन्हें उतारा था। फैषन शो में विभिन्न परिधानों पर रैम्प पर आने पर उपस्थित दर्षकों ने तालियां भी बजाई और माॅडल व फैषन डिजाइनर का उत्साहवर्धन किया। ष्षो के दौरान बनारसी स्कर्ट और लखनऊ की चिकनकारी तथा मिरर वर्क के साथ साथ हाथ की कढाई ने भी सभी को आर्कषित किया। फैषन ष्षो में उत्तर प्रदेष की थीम के अनुसार दीपों का भी एक रैम्प वाॅक देखने को मिला और जगह जगह पर दीप चल रहे थे। वहीं दूसरी ओर यूपी की एक लद्यु फिल्म भी दिखाई गई। इस ष्षो में राधे राधे और राम राम की आवाजों से गंुजयमान था। 
इस षो में मयूर डांस भी किया गया और इस कार्यक्रम ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस मौके पर यूपी के कपडा मंत्री श्री सत्यदेव पचैरी ने कहा कि यूपी देष ही नहीं बल्कि विदेषों तक प्रसिद्ध है और इसके तरह तरह के रंग व मेले देखने को मिलते है।
क््रमंाक-2018
सूरजकुंड मेला में आज उमडी भारी भीड
लगभग एक लाख 65 हजार लोगों ने मेला देखा
सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 11 फरवरी- हरियाणा के जिला फरीदाबाद के सूरजकुण्ड में चल रहा 32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुण्ड षिल्प मेला में आज दूसरा विकेंड की शुरूआत हुई जिसमें लगभग एक लाख 65 हजार लोगों ने मेला देखा।
इस संबंध में जानकारी देते हुए सूरजकुंड मेला प्राधिकरण के मुख्य प्रषासक श्री समीरपाल सरो ने बताया कि आज मेला में लोगों की अच्छी खासी भीड थी और लोगों में मेले के प्रति काफी उत्साह था। मेले में आज विभिन्न स्कूलों व कालेजों के बच्चों ने भी षिरकत की।
श्री सरो ने बताया कि सूरजकुंड मेला को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। उन्होंन बताया कि मेला में शौचालयों, पेयजल आपूर्ति, सीसीटीवी व्यवस्था के साथ-साथ फ्री वाईफाई की सुविधा भी लोगों को दी गई है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा लोगों की सुविधा के लिए एटीएम व मोबाईल एटीएम की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि मेले में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है तथा सार्वजनिक वाहनों में आने वाले लोगो के लिए विभिन्न स्थानों जैसे कि दिल्ली, गुरूग्राम व फरीदाबाद से हरियाणा रोडवेज की बसों को चलाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मेला में आने वाले लोगो की सुविधा के लिए निःषुल्क फेरी गाडियों की भी व्यवस्था की गई है। श्री सरो ने बताया कि लोगों को मेले में पौष्टिक व स्वच्छ भोजन के साथ -साथ विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए फूड कोर्ट भी स्थापित किया गया है।
क्रमांक-2018
-लोगों को अपना दीवाना बना रहा फायर पान
-दिल घबराए, पर फायर पान खाए बिना रहा न जाए
सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 11 फरवरी- डाॅन फिल्म का मषहूर गाना खईके पान बनारस वाला के बनारसी पान का स्वाद तो आपने चखा होगा लेकिन फायर पान का नाम ही आपने शायद पहले सुना हो। आमतौर पर पान को उसके स्वाद के लिए खाया जाता है। पान की तासीर ठंडी होती है, लेकिन जरा सोचिए कि अगर इस ठंडे पान में आग लगाई जाए और आग की लपटें निकले पान को खाया जाए तो। जी हां, यह सुन कर आश्चर्य तो होता है, पर फरीदाबाद के सूरजकुंड में चल रहे 32वें अंतर्राष्ट्रीय षिल्प मेले में कुछ ऐसे ही नजारे देखने को मिल रहे हैं। यहां फूड कोर्ट में पांडे पान पैलेस का फायर पान का स्वाद युवाओं को खूब भा रहा है।
मूलतः उत्तर प्रदेश के बनारस के विवेक पांडे अपने खानदानी काम को आगे बढ़ा रहे हैं। पीढियों से लजीज बनारसी पान का काम करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिता जी जमना प्रसाद पांडे पहले बनारस में ही पान की दुकान लगाया करते थे। फिर बाद में दिल्ली इंडिया गेट के पास पांडे पान पैलेस के नाम से दुकान बनाई थी। पिता के गुजरने के बाद तीन भाई दुकान चलाते हैं और देश भर में लगने वाले बड़े-बड़े मेलों में शिरकत करते हैं। मेले में फायर पान के अलावा चॉकलेट पान, घुंडी पान, भीगपान, स्ट्राबेरी पान, आइस पान, सादा पान के अलावा परंपरागत शाही बनारसी पान बनाते हैं। फायर पान में स्पेशल गुलकंद, फ्लेवर चटनी, जवाहर चटनी, ड्राइफ्रूट, ब्रास माउथफ्रेशर डालने के बाद उसमें आग लगा दी जाती है, लेकिन खाने से पहले आग बुझ जाती है, जिससे पान खाने वालों को कोई नुकसान नहीं होता।
सूरजकुंड मेला में फायर पान का जायका लेने वाले चंडीगढ के सुनील रंगा ने बताया कि वैसे तो वे पान के कम हीं शौकीन हैं, लेकिन बनारस का फायर पान और शाही बनारसी पान का स्वाद चखने की इच्छा थी। शुरू में डर तो लगा, पर जब दूसरों को देखा, तो हिम्मत बढ़ गई और ले लिया स्वाद अच्छा लगा।
क्रमांक-2018
युवा पीढ़ी को आटा चक्की के बारे में बता रहीं गुलाब देवी
सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 11 फरवरी- पुराने जमाने में घरों में अनाज पीसने के लिए हाथ से चलने वाली आटा चक्की का प्रयोग किया जाता था, लेकिन अब इसका प्रयोग लगभग समाप्त सा हो गया है। चक्की अब सिर्फ अतीत की एक वस्तु होकर रह गई है, लेकिन 32वें सूरजकुंड मेले में आईं गुलाब देवी बच्चों को अपनी इस अतीत की आटा-चक्की के बारे में बता रही हैं। उनकी यह आटा चक्की विदेशी टूरिस्ट के साथ-साथ बच्चों व युवाओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बच्चे व पर्यटक इसके साथ फोटो खिंचवाते हैं। वे इसके बारे में जानकारी लेती हैं। इस चक्की को मेले में लेकर आई हैं राजस्थान से गुलाब देवी व उनके पति मदन। उन्होंने कहा कि 1987 से जब से मेला शुरू हुआ, तब से यह चक्की मेले में आ रही है।
शिल्प कला का कुंभ माने जाने वाले सूरजकुंड मेला विरासत संभालने का गवाह बन रहा है। नई पीढ़ियां तेजी से अपने मां-पिता के पुश्तैनी कामों को संभाल रही हैं। विभिन्न कला को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोने का यहां नायाब उदाहरण देखने को मिल रहा है। मदनलाल और पुत्रवधू गुलाब देवी बताते हैं कि बेकार कपड़ों से राजस्थानी खिलौने बनाने का काम है। एक चरखा लेकर दोनों आए हैं। यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मदनलाल कहते हैं कि हरियाणा पर्यटन विभाग की बदौलत उनकी मां को हर साल अपनी कला दिखाने का मौका मिलता था। उसे बेसब्री से मेले का इंतजार रहता था। लेकिन आज वे हमारे बीच नहीं हैं, उनकी यादें हैं। मैं अपने आप को अन्य से थोड़ा भाग्यशाली समझता हूूं कि इस तरह मेले में कला प्रदर्शन का मौका मिल जाता है। मैं इसके लिए हरियाणाा सरकार व पर्यटन विभाग का आभारी हूं।
क्रमंाक-2018
सूरजकुण्ड मेला बना सेल्फी व फोटो का आर्कषण
सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 11 फरवरी- भईया एक फोटो खींच दोगे क्या? या  भईया एक फोटो खींच दो। इस प्रकार के शब्द आज कल फरीदाबाद के सूरजकुंड में चल रहे 32वें अंतर्राष्ट्रीय षिल्प मेला में घूमने आये  लोगों  के  कानों में अचानक ही सुनाई पड़ रहे है और लोग उनसे उनकी तस्वीर उनके स्मार्ट फोन या कैमरा में खीचने के लिए अनुरोध कर रहे हैं ताकि वे इन यादगार लम्हों को संजोकर रख सकें। सूरजकुंड मेला का आकर्षण हर  किसी विषेषकर युवाओं को अपनी ओर खींच रहा है।
सूरजकुंड मेला में आने वाले लोगों के लिए मेला परिसर में विभिन्न जगहों पर सेल्फी प्वाईंट भी बनाए गए हैं जहां पर लोग अपने यारों-प्यारों व परिजनों के संग जमकर सेल्फियां ले रहे हैं और अन्य लोगों से भी फोटो खींचने के लिए अनुरोध कर रहे हैं। लोगों के लिए मेला स्थल पर विषाल गेंडा के अलावा अन्य सेल्फी प्वाईंट भी बनाए गए हैं। 
यूं तो कला और संस्कृति के संगम यानी सूरजकुंड मेले की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है, देश-दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक यहां घूमने आते हैं, लेकिन फरीदाबाद सहित पूरे दिल्ली-एनसीआर के लोगों में इस मेले के प्रति लगाव और उल्लास कुछ ज्यादा ही दिखाई पड़ता है। ऐसे काफी परिवार हैं, जो हर साल यहां आते हैं। कुछ परिवारों के लिए यहां आना परंपरा का हिस्सा बन चुका है, तो कुछ लोग नया साल आते ही इस मेले का बेसब्री से इंतजार करने लगते हैं।
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सूरजकुंड मेला में दिख रही महिला सशक्तीकरण की झलक
सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 11 फरवरी- फरीदाबाद के सूरजकुंड में चल रहे 32वें अंतर्राष्ट्रीय षिल्प मेले में हर जगह महिला सशक्तिकरण की झलक नजर आ रही है। एक ओर जहां मेले में कई स्टॉल की कमान महिलाओं के हाथ में हैं वहीं विभिन्न जगहों से मेला में प्रतिभागिता करने आईं महिला कलाकार चैपाल पर भी अपनी कला का लोहा मनवा रही हैं।
सूरजकुंड मेला में सीरिया, दक्षिण अफ्रीका, किर्गिस्तान, थाईलैंड, ताजिकिस्तान, श्रींलका के स्टॉलों को महिला उद्यमी ही संचालित कर रही हैं। इसके साथ ही नेपाल और श्रीलंका के स्टॉलों पर बिकने वाला खूबसूरत सामान महिला हस्तशिल्पियों की कल्पना, सौंदर्यबोध, विनम्रता और निपुणता के साथ ही मानवीय संवेदनाओं को सूक्ष्मता से जानने की उनकी प्रतिभा को उजागर कर रहा है। यही नहीं किर्गिस्तान, जिंबाव्वे, कंबोडिया, तजाकिस्तान, तंजानिया की नृत्य-संगीत टोलियों में भी महिलाओं का ही बोलबाला है। विदेशी कलाकारों के ग्रुप में भी महिलाओं का ही बोलबाला है। इन महिला कलाकारों ने बताया कि उन्होंने यह मुकाम अपनी मेहनत से पाया और इंटरनेशनल मेले तक का सफर तय किया है।  रविवार को मेला में रही भारी भीड़ 32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेला के दूसरे संडे को मेला परिसर में भारी भीड देखने को मिली। रविवार को छट्टी होने के कारण मेले का लुफ्त उठाने के लिए भारी संख्या में लोग मेला परिसर में पहुंचे। रविवार  को लोगों ने विदेशी शिल्पकारों के सामान की जमकर खरीदारी की और मेला में खूब मौज-मस्ती की। चैपाल पर थिरके कदम सूरजकुंड मेले में चैपाल पर देश विदेश के कलाकारों ने लोक नृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक छंटा बिखेरी। चैपाल पर थिरकते कदमों ने पर्यटकों के उत्साह को बढ़ाने का काम किया। कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से विभिन्न संदेश दिए। विभिन्न राज्यों व विदेषों से आए कलाकारों के लोकनृत्यों ने लोगों का मन मोह लिया और चैपाल पर नृत्य के माध्यम से समां बांध दिया।
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सूरजकुण्ड मेला में लोग रहे हैं विभिन्न व्यंजनों का स्वाद मेला परिसर में हैं फूड कोर्ट
सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 11 फरवरी-फरीदाबाद के सूरजकुंड में चल रहे 32वें अंतर्राष्ट्रीय षिल्प मेले में विभिन्न राज्यों की कला-संस्कृति और हस्तशिल्प ही नहीं, जायका भी लोगों को खूब भा रहा है। आमतौर पर फास्ट फूड पसंद करने वाले लोग यहां विभिन्न राज्यों के देसी व्यंजनों का चटखारा लेते दिखाई पड़ते हैं। हालांकि इन व्यंजनों की दरें भी कम नहीं हैं, लेकिन तब भी स्वाद जेब पर भारी पर पड़ रहा है। 32वें अंतर्राष्ट्रीय षिल्प मेले में सभी फूड कोर्ट में यूं तो तमाम तरह के वेज और नॉन वेज व्यंजन उपलब्ध हैं, लेकिन दर्शकों की पहली पसंद विभिन्न राज्यों की पहचान देसी व्यंजन ही बन रहे हैं।
मेला दर्शकों में चाउमीन, बर्गर, फ्राइड राइस, मंचूरियन, सैंडविच और मोमोज इत्यादि का बहुत क्रेज नजर नहीं आता जबकि बिहार का लोकप्रिय लिट्टी चोखा और अनारसा दर्शकों के खूब मन भा रहा है। मेले में 80-100 रुपये में उपलब्ध ये व्यंजन जेब भी हल्की नहीं करते हैं। विक्रेता देवेंद्र सिंह बताते हैं कि दिल्ली में बिहार के लोगों की बढ़ती संख्या कहें या इन व्यंजनों का स्वाद, लेकिन वे सात साल से मेले में स्टॉल लगा रहे हैं। हर साल मेला घूमने आने वालों का रिस्पांस पहले से ज्यादा मिलता है।
पंजाब की पहचान मक्के की रोटी और सरसों का साग भी दिल्ली वालों के मन भा रहा है। सफेद मक्खन के साथ लोग इसके भी खूब चटखारे ले रहे हैं। इसी तरह राजस्थानी व्यंजनों में बाजरे की रोटी और सांगरे की सब्जी, जोधपुरी मावा कचैरी, प्याज कचैरी, चूरमा बाटी और कुल्हड़ की केसरिया चाय भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं। उत्तर भारतीय व्यंजनों में छोले भठूरे और नान एवं दाल मक्खनी भी पसंद की जा रही है। हालांकि इन सब व्यंजनों की दर 120 से 150 रुपये तक है, मगर फिर भी स्वाद के शौकीनों की भीड़ देखते ही बनती है।
क्रमांक-2018
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