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32th – Surajkund Meal Stories

Information, Public Relations Haryana

सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 5 फरवरी-वेसे तो आजकल लगभग हर व्यक्ति के हाथ में स्मार्ट फोन है और वह सेल्फी लेने से गुरेज भी नहीं करता है। यदि समय और स्थान सही हो तो हर व्यक्ति अपने स्मार्ट फोन से सेल्फी लेने से नहीं चूकेगा। जी हां सेल्फी लेने के लिए आप 32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड षिल्प मेला में आईए और विभिन्न स्थान, कलाकृतियां व सेल्फी प्वाईंट पर सेल्फी ले सकते हैं। सूरजकुंड मेला में विभिन्न स्थानों को सेल्फी प्वाईंट के लिए निर्धारित किया गया है और लोग बडे ही चाव के साथ सेल्फी ले रहे हैं। मेला में सेल्फी लेना भी एक विषेष आकर्षण है क्योंकि यहां सेल्फी लेना उन लोगों के लिए एक यादगार होगा जो मेला में घूमने आए हैं।
क्रमांक-2018

 सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 5 फरवरी-32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड षिल्प मेला में प्रत्येक दिन रंगा-रंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है और इसी कडी में आज विभिन्न देषों व प्रदेषों के कलाकारों ने अपने गायन और नृत्य से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया और लोगों ने कलाकारों के लिए तालियां बजाकर उनकी हौसला अफजाई की। आज मुख्य चैपाल पर मोरक्को देष के कलाकारों ने अपना अध्यात्मिक संगीत प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति को देखकर दर्षकों ने कलाकारों के प्रति तालियां बजाई और सीटी मारकर उनकी हौसला अफजाई की। ऐसा माना जाता है कि मोरक्को का यह एक परंपरागत डांस भी हैं। इसके पष्चात तंजानिया देष के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। तंजानिया वन, जीव, झील और सफारी के लिए जाना जाता है और यहां पर सुहाती भाषा बोली जाती है। तंजानिया के कलाकारों ने मुख्य चैपाल पर सोवा डांस प्रस्तुत किया। यह डांस वास्तव में एक अलग प्रकार का नृत्य था और इसमें मित्रता का भाव देखने के साथ-साथ उत्साह भी दिखाई दे रहा था। वहीं दूसरी ओर देष के समुद्री तट से जुडे उडीसा राज्य के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। पष्चिमी उडीसा के इन कलाकारों ने डालखाई नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें महिलाएं और पुरूष ढोल-नगाडों के साथ-साथ बाजे पर नाच रहे थे। यह नृत्य एक आकर्षण था जिसने लोगों को अपनी ओर खींचे रखा और उन्हें उनकी सीट से उठने नहीं दिया। इसी प्रकार थीम राज्य उत्तर प्रदेष के कलाकारों ने पाईडांडा नृत्य प्रस्तुत किया, जिस पर उपस्थित दर्षकों ने कलाकारों के प्रति तालियां बजाकर उनका हौसला बढाया। मुख्य चैपाल पर सिक्किम राज्य के कलाकारों ने राईचांडी नृत्य को प्रस्तुत किया। वास्तव में यह नृत्य काफी रोचक था। इसके पष्चात तंजानिया के ही कलाकारों ने एक और नृत्य गोंग डांस प्रस्तुत किया। आज मुख्य चैपाल के पंजाब के कलाकारों ने भी मेले में आने वाले लोगों को बांध रखा।
क्रमांक-2018

सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 5 फरवरी-अगर आप सिल्क के कपडों के शौकिन है तो 32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड षिल्प मेला में जरूर पधारें। आपको यहां थीम राज्य उत्तर प्रदेष के सिल्क की बनी साडियां देखने व खरीदने को मिलेंगी। उत्तर प्रदेष के अपना घर में सिल्क की साडियों को दर्षाया गया है। सिल्क साडी के बुनकर बसीउल हसन ने बताया कि यह सिल्क की साडियां हाथ से तैयार की जाती हैं और एक साडी को तैयार करने में 3 लोगों को 25 दिन का समय लगता है। यदि वे रोजाना 12 घंटे काम करे तो। उन्होंने यह असली जरी की सिल्क साडियां होती हैं। हसन के अनुसार इन साडियों को तैयार करने के लिए असली जरी का इस्तेमाल किया जाता है। साडियों को तैयार करने की विधि के बारे में जानकारी देते हुए वसीउल हसन ने बताया कि सबसे पहले नटावा पर धागे को बुना जाता है उसके बाद परेटा का उपयोग करते हुए धागे की कास्तकारी की जाती है। उन्होंने बताया कि परेटा के उपयोग के पष्चात चरखा चलाया जाता है और सिल्क को तैयार करने की विधि शुरू होती है इसके पष्चात करघा का उपयोग होता है और सिल्क का कपडा हाथ की बुनाई द्वारा ही तैयार किया जाता है। सिल्क बुनकर वसीउल हसन ने बताया कि इस प्रकार से तैयार साडी का मूल्य 45 हजार रूपए तक होता है और इस प्रकार की साडियां ज्यादातर बडे-बडे घरानों की महिलाएं और सेलिब्रिटी पहनती हैं। अपना घर में उपस्थित गुरूग्राम से आई हुई मोना शर्मा ने बताया कि वे इन साडियों को बडे ही ध्यान से देख रही हैं और जानकारी ले रही हैं। उनका कहना है कि इन साडियों का स्टफ काफी बेहतर है और यह बडी ही उच्च गुणवत्ता की साडियां हैं। उनके अनुसार वे विषेष आयोजनों में साडी का ही उपयोग करती हैं और उन्हें ये साडियां काफी पसंद आ रही हैं परन्तु इनका दाम उनकी पहुंच से काफी अधिक है।
क्रमांक-2018

सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 5 फरवरी-32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड षिल्प मेला में आज रंगोली प्रतियोगिता (सीनियर वर्ग) का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का आयोजन डिजाईनर गैलरी में हुआ, जहां 9 स्कूलों के बच्चों ने भाग लिया। रंगोली प्रतियोगिता (सीनियर वर्ग) में आज प्रथम स्थान फरीदाबाद सैक्टर 28 के डायनेस्टी इंटरनेषनल टीटी पब्लिक स्कूल ने प्राप्त किया। फरीदाबाद सैक्टर 28 के डायनेस्टी इंटरनेषनल टीटी पब्लिक स्कूल के बच्चों ने डिजिटल इंडिया योजना के तहत की जा रही गतिविधियों को रंगोली के माध्यम से दर्षाया है। इस रंगोली में बीच में देष के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर बनाई गई है और उसके साथ अगले दायरे में बेटी बचाओ-बेटी पढाओ, स्किल्ड इंडिया, मेकइन इंडिया, उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, डिजिटल इंडिया, स्वच्छता योजना, प्राईड आॅफ इंडिया के साथ-साथ बदलता हरियाणा-बढता हरियाणा की टैग लाईन को भी सूरज की आकृति में दर्षाया गया है।
इस प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान फरीदाबाद के सैक्टर 23 के संजय कालोनी के मार्डन बीपी पब्लिक स्कूल के बच्चों ने प्राप्त किया। फरीदाबाद के सैक्टर 23 के संजय कालोनी के मार्डन बीपी पब्लिक स्कूल के बच्चों ने इस रंगोली में थीम राज्य उत्तर प्रदेष की टैग लाईन यूपी नहीं देखा-तो इंडिया नहंी देखा को दर्षाया है। इसके अलावा यूपी से संबंधित महापुरूषों की तस्वीर को भी रंगोली में बखूबी दिखाया गया है। वहीं दूसरी ओर यूपी की प्राकृतिक छटा को भी रंगोली में जगह दी गई है। इस रंगोली में यूपी के पारंपरिक और अध्यात्मिक कलाओं को भी बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। इसी प्रकार तृतीय स्थान फरीदाबाद के सैक्टर 7 के सेंट जाॅन स्कूल के बच्चों ने प्राप्त किया। फरीदाबाद के सैक्टर 7 के सेंट जाॅन स्कूल के बच्चों ने अपनी रंगोली में फाॅक आर्ट का प्रदर्षन किया है। यह रंगोली वास्तव में एक विचित्र प्रकार की चित्रकला की तरह दिखाई देती है। इसमें विभिन्न आकृतियों और नमूनों को अलग-अलग दिषाओं में अग्रसर करते हुए दिखाया गया है।
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सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 5 फरवरी-यूपी नहीं देखा तो इंडिया नहीं देखा। यह टैग लाईन इस बार 32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड षिल्प मेला में थीम राज्य उत्तर प्रदेष ने दी है और हर बार की तरह इस बार भी थीम राज्य द्वारा अपना घर स्थापित किया गया है।
थीम राज्य उत्तर प्रदेष ने अपना घर मुख्य चैपाल के पीछे मुख्य द्वार पर स्थापित किया है और उत्तर प्रदेष के अपना घर में आपको उत्तर प्रदेष के ग्रामीण आंचल में बसने वाले लोगों के घरो जैसे घर को दर्षाया गया है। यह घर कच्ची मिट्टी व लेप से तैयार किया गया है और छत पर घास-फूंस का छप्पर लगाया गया है। आपने अपने बचपन में ग्रामीण आंचल में इस प्रकार के घर देखे होंगे।
उत्तर प्रदेष के अपना घर में आप लोगों को एक खटिया, मेज तथ कुर्सी दिखाई देगी जो कि वहां पारंपरिक घरों में आम तौर पर होती है। इसके अलावा उत्तर प्रदेष के अपना घर में एक कुंआ जिस पर चाप है जिसे हम आमतौर पर हेंडपंप भी कहते हैं, को दर्षाया गया है। वहीं दूसरी ओर अपना घर में नीचे बैठने के लिए एक समतल स्थान भी मिट्टी और लेप से तैयार किया गया है जो कि उत्तर प्रदेष में ऐसे ग्रामीण घरों में होते हैं। उत्तर प्रदेष के अपना घर में करघा को भी दिखाया गया है, जिस पर षिल्क का कार्य करते हुए कलाकार भी उपस्थित है। इस करघा को देखकर लोग काफी उत्साह के साथ देख रहे हैं और उक्त कलाकार के साथ अपना घर तथा उसमें रखे हुए सामान के बारे में जानकारी ले रहे हैं। गाजियाबाद से आए हुए राममेहर ने बताया कि वे इस मेला में दूसरी बार आए हैं और उन्होंने यहां पर यूपी द्वारा बनाई गई विभिन्न कलाकृतियों को देखा है लेकिन जब वे थीम राज्य उत्तर प्रदेष के अपना घर में आए तो उन्हें अपना बचपन याद आ गया कि वे भी इस प्रकार से ऐसे ही घरों में पले-बढे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेष में पहले ज्यादातर ग्रामीण आंचल में इसी प्रकार के छप्पर वाले घर हुआ करते थे।
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हरियाणा रसोई में चखें हरियाणवी व्यंजनों का स्वाद

सूरजकुण्ड, (फरीदाबाद) 5 फरवरी-यदि आप हरियाणवी व्यंजनों के शौकिन हैं तो चले आईए 32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड षिल्प मेला में| सूरजकुंड में चल रहे 32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड षिल्प मेला परिसर में हरियाणवी व्यंजनों के शौकिनों के लिए हरियाणवी रसोई को स्थापित किया गया है। इस रसोई में आगंतुक हरियाणा के पारंपरिक व्यंजनों जैसे कि बाजरे की खिचड़ी, कचरी की चटनी, टिकड़ा जैसे लजीज व्यंजन का लुत्फ उठा सकते हैं। इसके अलावा लोग रसोई में बाजरे व मेथी की रोटी, टिकड़े, बाजरे की खिचड़ी, दलिया, शक्कर रोटी, खांड रोटी, शक्कर वाली खीर का आनंद भी ले पाएंगे, तो वहीं चना, सरसों, बथुए का साग, पीली दाल, चूरमा व ग्वार की फली की सब्जी, पापड़ की सब्जी, बड़ी का साग व कढ़ी के अलावा हरियाणवी खट्टी रबड़ी तथा लस्सी का भी स्वाद भी लोगों को लेने के लिए मिल रहा है।

फरीदाबाद के बल्लभगढ से आए हुए चरणदास ने बताया कि वे आज यहां हरियाणवी रसोई में अपने पारंपरिक व लजीज व्यंजनों का स्वाद चखने आए हैं क्योंकि आमतौर पर इस प्रकार के व्यंजन अब घरांे में बनने बंद हो गए हैं। लेकिन यहां पर हर वो हरियाणवी व्यंजन लोगों के लिए उपलब्ध हैं जो पहले गांव-देहात में खाए जाते थे और परोसे जाते थे।
इसी प्रकार हिसार से आए हुए साहबराम ने बताया कि वे सूरजकुंड मेला में दूसरी बार आए हैं और इस बार उन्होंने हरियाणवी रसाई के दर्षन किए और यहां जो शक्कर वाली खीर परोसी जा रही है उसका उन्होंने स्वाद लिया है। साहबराम का कहना है कि ऐसा माना जाता है कि शक्कर वाली खीर शुगर की मात्रा को शरीर में बढने नहीं देती है और इसके खाने से व्यक्ति को भरपूर ताकत मिलने के साथ-साथ उसके रक्तचाप को भी संतुलित रखती है। रोहतक से आए हुए नफे सिंह ने बताया कि वे सूरजकुंड मेला में अपने परिवार के साथ पहली बार आए हैं और उनकी आयु लगभग 72 वर्ष है। उन्होंने बताया कि यह मेला शहरी लोगों को ग्रामीण परिवेष की ओर ले जाने का काम कर रहा है और इस प्रकार के मेले व आयोजन आमतौर पर आयोजित होने चाहिए जिससे लोग अपनी पारंपरिक धरोहरों के साथ जुडे रहे जैसे कि मेला में हरियाणवी रसोई को स्थापित किया गया है तथा अन्य प्रकार की गतिविधियों भी मेले में देखने का मिल रही हैं।
क्रमंाक-2018
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